अध्याय १ → २ · शुद्ध सूर्यसिद्धान्त · बीज = ०

गणित-पाठ

एक-एक कण। पहले इकाई, फिर युग, फिर भगण, फिर अहर्गण, फिर मध्यम, फिर मन्दफल। श्लोक यहाँ गढ़ा नहीं — सूत्र वही हैं जिनसे यह इंजन चलता है। गणक — दिवससङ्ख्या और बड़ी गणना। मकर − सू.सि. सायन २७०° · मेष − सू.सि. सायन ०° — −१००००…१०००० ई., पाँच-पाँच सौ वर्ष (IAU विषुव/अयनांत नहीं)। SS − दृक् स्फुट विचलन — −१००००…५००० ई., पाँच-पाँच सौ वर्ष। मेषादि-योग पञ्चाङ्ग — कलि · त्रेता · कृतयुगान्त · सृष्टि।